हास्य रस की परिभाषा एवं उदाहरण: Hasya Ras Ki Paribhasha Udaharan Sahit

हिंदी व्याकरण के विषय में रस एक महत्वपूर्ण अंग है जिसके बिना किसी भी काव्य को नवीनता व रोचकता नहीं प्राप्त होती। सभी काव्य में रस का इस्तेमाल किया जाता है इसी बात को ध्यान रखते हुए आज के अपने इस पोस्ट में हम आपके हास्य रस के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करने वाले हैं।

Hasya Ras Ki Paribhasha

हास्य रस की परिभाषा

किसी की क्रिया-कलाप, वाणी वेशभूषा और चेष्टा को देखकर आपके मन में जिस तरह का भाव उत्पन्न हो उसे हास कहा जाता है और जब यही हास अनुभव विभव और संचारी भाव से पुष्ट होता है तो उसे हास्य रस कहा जाता है।

हास्य रस के भेद

हास्य के छह भेद किए गए हैं, जो कि निम्न प्रकार से बताए गए हैं।

  1. स्मित
  2. हसित
  3. विहसित
  4. उपहसित
  5. अवहसित 
  6. अतिहसित

हास्य रस के उपकरण

हास्य रस के मुख्य रूप से पांच उपकरण होते हैं।

  • स्थाई भाव:- हास (हास्य)
  • आलंबन विभाव:- क्रिया चेष्टा और आकर
  • उद्दीपन विभव:- विचित्र वेशभूषा और क्रियाकलाप
  • अनुभव:- मुस्कान, हंसी
  • संचारी भाव:- उत्सुकता, आलस, हंसी

हास्य रस के उदाहरण

नाना वाहन नाना वेषा। विंहसे सिव समाज निज देखा॥

कोउ मुखहीन, बिपुल मुख काहू बिन पद कर कोड बहु पदबाहू॥’

स्पष्टीकरण-

स्थायी भाव- हास

आलम्बन विभाव- शिव समाज

आश्रयालम्बन- भगवान शिव स्वयं

उद्दीपन- विचित्र वेशभूषा

अनुभाव- भगवान शिव का हंसना

संचारी भाव- रोमांच, हर्ष, चापल्य

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